बाबा की बिटिया हूं
बाबा के आंगन की चिड़ियां हूं
मां के आंचल में बंधी टिकियां हूं
सारे घर में फुदकती रहती जो,
वो तितलियां हूं,
मैं मां की गुड़िया और बाबा की बिटिया हूं......
बाबा के कहानियों की पारियां हूं
मां के लोरियों की चंदनीयां हूं
दद्दू जो बुझा करतें वो पहेलियां हूं
मैं मां की गुड़िया और बाबा की बिटिया हूं.......
मिश्री की मैं तो पुड़िया हूं
मीठे रस से भरी मंदरस की डिबिया हूं
सबको जो भाएं ,वो सोहन मिठईया हूं
मैं मां की गुड़िया और बाबा की बिटिया हूं.......
दीवाली की फुलझरीयां हूं
रजनीगंधा की लड़ियां हूं
हर आंगन में जो रंग भरे, वो रंगोलियां हूं
मैं मां की गुड़िया और बाबा की बिटिया हूं........

No comments:
Post a Comment