किस बात का तुझको डर हैं
जब साथ खुद के तू है
क्यूं है तू रुका पड़ा
जब कदमों में तेरी जान हैं
क्यूं है ख़ुद से तू रूठा हुआ
जब मनाना भी खुद ही को हैं
किस बात का तुझको डर हैं
जब साथ खुद के तू है
समझ ना खुद को तन्हा तू
वो खुदा भी तेरे साथ है
क्यूं है तू झुक रहा
इस परीक्षा की घड़ी में
क्यूं है तू टूट राहा
जब समेटना भी खुद ही को हैं
किस बात का तुझको डर हैं
जब साथ खुद के तू है